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नवभारत टाईम्स
15 अगस्त, 2015 आज इंडिया की इंडिपेंडेंस डे के मौके पर प्राईम मिनिस्टर ने फ्लैग सेरोमेनी के समय देश की सारी पॉपुलेशन को कॉंग्रचुलेट किया और सभी सिटिज़ेंस से ये रिक्वेस्ट किया कि वो इंडिया की ऑल-डाईमेंशन प्रोग्रेस में लग जायें. आज इंडपेंडंस डे के दिन कई शहरों में परेड ऑर्गनाईज़ की गयीं और स्कूल्स में स्टुडेंट्स में मिठाईयाँ डिस्ट्रीब्यूट की गयीं...
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Navabhaarat Times
August 15, 2027
Aaj India kee Independence Day ke occasion par Prime Minister ne flag ceremony ke time country kee entire populations ko congratulate kiya aur sabhi citizens se ye request kari ki vo India ki all-dimension progress mein involve ho jayen. Aaj Independence Day ke din kai cities mein parades organize kee gayi aur schools mein students ke liye sweets distribute kee gayee…
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- अतुल श्रीवास्तव
10 टिप्पणियां:
हा हा क्या सही दृश्य दिखाया है आपने । मुझको बी लगता हाइ की हिन्दि को ईजी बनाने को माँगता हए ।
घुघूती बासूती
bahut hi sahi lakha hai....aapka observation vakai kamal ka hai....
कमेंट भी 2007 की स्टाइल में होने चाहिये. वैसे 'नवभारत टाइम्स' का आधा नाम भी तो अंग्रेज़ी में है तो लिटिल बिट इंगलिश तो यूज़ करनी ही पड़ेगी. डोंट बी अलार्म्ड! बाई द वे आपको हैप्पी इंडिपेंडेंस डे.
बहुत ख़ूब :)
आपको स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें !!
happy independence day ji,
आप का ब्लॉग पुस्तक से ज़्यादा आचा लगा है मुजको
क्या आप ए सब हिंदी मे चाप ने के लिए quillpad.in/hindi उपयोग किया
एह काफ़ी अच्छा लिखा है. मगर हिंदी को ग़ैर हिंदी क्षेत्रों में सरल बनाने के लिए कुछ अँग्रेज़ी शब्दों को सम्मिलित करना पड़े तो कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. -धर्मेन्द्र सिंह
हे हे मजेदार!
ब हू हू, कहाँ से कहाँ आ गए हम। :(
वाह, बहुत फुचारिस्टिक सोच है आपकी अतुल - पढ़ कर बहुत एन्जॉय किया! इसे रीड करके मुझे एक वास्तविक इनसिदेंट याद आ गया... करीब २० येअर्स बैक, नौएडा के जल वायु विहार कॉलोनी मे (जहाँ mostly आर्मी/नेवी ओफिसेर्स रहते हैं ) , मॆंने सड़क पर वाक करते हुए नोट किया कि ईक १३-१४ यीअर्स ओल्ड गर्ल सड़क पर जा रहे एक बूढ़े, गरीब और अनपढ़ केले के ठेले वाले को रोक कर पूछती है "अंकल जी, plantain का क्या प्राइस है"...poor ठेले वाले के चेहरे का एक्सप्रेशन आप ख़ुद ही इमेजिन कर सकते हैं!!
- प्रशांत
सामने सब के स्वीकार करता हूँ
हिन्दी से कितना प्यार करता हूँ
कलम है मेरी टूटी फूटी
थोड़ी सुखी थोड़ी रुखी
हर हिन्दी लिखने वाले का
प्रकट आभार करता हूँ
आप लिखते रहिए
मैं इन्तज़ार करता हूँ ।
NishikantWorld
बहुत खूब
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