पाँच ट्रक स्वाहा.
..........एक मूर्ति को किसी ने रंगा,
..........कई गाड़ियों के डिब्बे स्वाहा.
आरक्षण का समाचार उड़ा,
बीस नगर बसें स्वाहा.
..........एक चलचित्र नगर में लगा,
..........दिखाने वाला हॉल स्वाहा.
आज कुछ करने को नहीं,
सड़क के बीच में नेताओं के पुतले स्वाहा.
..........फिर से हार के आ गये,
..........कुछ एक खिलाड़ियों के घर स्वाहा.
बेरोज़गार युवक भड़के,
सड़क पर खड़ी कारें स्वाहा.
..........चलो दंगा करें,
..........सौ हिन्दू और सौ मुसलमान स्वाहा.
अब सब मिल कर कहें,
स्वाहा, स्वाहा, स्वाहा – पूरे देश का स्वाहा.
अब सभी श्रद्धालु लोग अपने अपने मस्तक पर इस पवित्र राख का टीका लगा लें.
..........कई गाड़ियों के डिब्बे स्वाहा.
आरक्षण का समाचार उड़ा,
बीस नगर बसें स्वाहा.
..........एक चलचित्र नगर में लगा,
..........दिखाने वाला हॉल स्वाहा.
आज कुछ करने को नहीं,
सड़क के बीच में नेताओं के पुतले स्वाहा.
..........फिर से हार के आ गये,
..........कुछ एक खिलाड़ियों के घर स्वाहा.
बेरोज़गार युवक भड़के,
सड़क पर खड़ी कारें स्वाहा.
..........चलो दंगा करें,
..........सौ हिन्दू और सौ मुसलमान स्वाहा.
अब सब मिल कर कहें,
स्वाहा, स्वाहा, स्वाहा – पूरे देश का स्वाहा.
अब सभी श्रद्धालु लोग अपने अपने मस्तक पर इस पवित्र राख का टीका लगा लें.
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6 टिप्पणियां:
ohm! shanti shanti shanti....aacha katacha hai
Dear Atul. Thanks. Have been enjoying your writings.keep it up.
एक स्वाहा भूल गये,
घर आया 'ओनीडा' टी वी
पड़ोसी हुआ स्वाहा.
bahut sahi aur aacha likha hai aapne ..
ranju
मान गये क्या गागर में सागर भरा है, ये पोस्ट हम से छुट कैसे गया
so beautiful....hamare desh k loktantar par is se bada kataksh nahi ho sakta....swaha swaha.....
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